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Shastri सबसे साहसी प्रधान मंत्री, 1965 में पाकिस्तान पर जबरदस्त जवाबी हमले का आदेश दिया था: जीडी बक्शी
Shastri
1 सितंबर, 1965 को छंब-जौरीयन सेक्टर में हमला करने वाले पाकिस्तानी सेना, अखनूर पर कब्जा करने की कगार पर थी। छंब सेक्टर में उस दिन सुबह पाकिस्तानी सेना ने टैंकों और तोपों से हमला किया था। इस हमले से भारतीय सेना और ख़ुफ़िया एजेंसियों अचरज में पड़ गए थे। पाकिस्तानी सेना के कमांडर थे जनरल अख्तर मलिक। सेना में कुछ लोग थे, जो जनरल मलिक को ‘जीत’ के लिए श्रेय नहीं देना चाहते थे क्यों की वह अहमदिया था। इसीलिए रातोंरात, उन्हें स्थानांतरित कर दिया गया था और जनरल याह्या खान ने उस पद को संभाला।

 

तब भारत के प्रधान मंत्री श्री लाल बहादुर Shastri थे और रक्षा मंत्री थे यशवंत राव चव्हाण। उसी दिन दोपहर 4 बजे भारत के रक्षा मंत्रालय में इस विषय पर मीटिंग हुई। रक्षा मंत्री यशवंत राव चव्हाण, एयर मार्शल अर्जन सिंह, एडजुटेंट जनरल लेफ़्टिनेंट जनरल कुमारमंगलम और रक्षा मंत्रालय के विशेष सचिव इस मीटिंग में मौजूद थे।

 

पाकिस्तानी सेना की कमांड के बदलाव के कारण अखनूर पर कब्जा करने के प्रयास में देरी हुई। इस बीच, भारतीय सेना, ने  भारतीय वायु सेना से सहायता के लिए कहा। भारतीय वायु सेना ने तत्काल प्रतिक्रिया की , पर तब तक, युद्ध के पहले दिन चार Vampires खो दिए गए थे।

 

थल सेनाध्यक्ष जनरल जेएन चौधरी ने जवाबी हमला करने के लिए सीमा पार करने की इजाज़त मांगी। उसी दिन देर रात को प्रधान मंत्री कार्यालय में बैठक हुई। प्रधानमंत्री लाल बहादुर Shastri अचानक अपनी कुर्सी से उठे और कमरे में चहलक़दमी करने लगे। सीपी श्रीवास्तव, शास्त्रीजी के सचिव, ने अपने किताब ‘ए लाइफ़ ऑफ़ ट्रूथ इन पॉलिटिक्स’ में इस विषय पर लिखा – “शास्त्री ऐसा तभी करते थे जब उन्हें कोई बड़ा फ़ैसला लेना होता था। मैंने उनको बुदबुदाते हुए सुना… अब तो कुछ करना ही होगा।”

 

प्रधान मंत्री लाल बहादुर Shastri ने पाकिस्तान पर जबरदस्त जवाबी हमले का आदेश दे दिया। उन्होंने फिर से बैठक की और यह निर्णय लिया की कश्मीर पर हमले के जवाब में भारतीय सेना लाहौर की तरफ़ मार्च करेगी। आदेश देने से पहले शास्त्री ने ये बात किसी से साझा नहीं की। इस बैठक में हमला करने की योजना को अंतिम रूप दिया गया। हमले का समय चुना गया 6 सितंबर को सुबह 4 बजे।

 

भारतीय सेना ने तीन मोर्चों से लाहौर पर हमला किया – वाघा-लाहौर, हरीक-खलरा- बरकी, और खेमकरण-केसूर एक्सिस। पाकिस्तान को अपनी सेना की वहां तैनाती करना पड़ी और छंब क्षेत्र में उसकी सेना की प्रगति रुक गई।

 

युद्ध चलता रहा और 22 सितंबर 1965 को ceasefire लागू हुआ अंतर्राष्ट्रीय दबाव के कारण। प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री के जबरदस्त जवाबी हमले के आदेश के निर्णय पर हाल ही में मेजर जनरल (डॉ) गगनदीप बख्शी ने यह कहा कि Shastri ही भारत के सबसे साहसी प्रधान मंत्री थे।
PM Shastri opinion
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